कहां लौं कहिए ब्रज की बात

भूमिका
वंदे हास्यरसम
व्यंग्य-विनोद शास्त्र से लोक तक
समय की देन हूं मैं
कहां लौं कहिए ब्रज की बात
राष्ट्रवाणी
हिन्दी चले तो कैसे चले
आपुन मुख हम आपुन करनी
यह विस्फोट अहम्‌ का है
तो सुनो मेरी कहानी
ओम शान्ति !
तथा बिगड़-बिगड़कर बना है और आज की अभावग्रस्त परिस्थितियों में भी अपने अस्तित्व को बनाए रखकर सिर ऊंचा करके खड़ा हुआ है, उसे कौन भूल सकता है ? उसे कैसे भुलाया जा सकता है ? ब्रज भारत की महत्ता का, राष्ट्र की सांस्कृतिक एकता का, साहित्य का, कला का और अध्यात्म का प्रतीक है। भारत माता का हृदय है न। इसके स्पंदनों से ही संपूर्ण राष्ट्र में शुद्ध रक्त का, अजस्र ऊर्जा का और दिव्यता का अखंड रस प्रवाहित हुआ है। पूछो दक्षिण के आचार्यों से। महाराष्ट्र के संतों से। गुजरात के आवाल-वृद्ध नर-नारियों से। गिरिधर गोपाल के रंग में रंगी मीरा के प्रदेश राजस्थान से। गुरुओं के प्रदेश पंजाब से। वैष्णो देवी की भूमि जम्मू-कश्मीर से। 'भज गोविंदम्‌ ! भज गोविंदम्‌ !!' के गायक आदि शंकराचार्य के प्रदेश केरल से। राधाकुंड और गोवर्धन में अपनी इहलीला समाप्त करने वाले उड़ीसावासियों से। ब्रजबुलि में रचना करने वाले पूर्वांचल प्रदेशों से। ब्रज का ग्वालबाल बनने की कामना करने वाले विश्ववंद्य कवींद्र रवींद्र से। महाकवि सुब्रह्मण्यम भारती से। महारास को अपना महाप्राण अनुभव करने वाले मणिपुर के लोगों से। और किससे नहीं ? सभी यह कहते सुने जाएंगे -'मोहि ब्रज बिसरत नाहिं।'

जब से हड़प्पा और मोहनजोदड़ो तथा सिंधुघाटी की सभ्यता की खोज का सिलसिला प्रारंभ हुआ है, तब से पुरातत्ववेत्ताओं का ध्यान ब्रज के भग्नावशेषों, चैत्यों, स्तूपों, टीलों, प्राप्त मूर्तियों पर गया है। फलस्वरूप उत्खनन पर उत्खनन की श्रृंखलाओं से प्राप्त प्रागैतिहासिक सामग्रियां यह सिद्ध करती जाती हैं कि भारत की केंद्रीय संस्कृति और इतिहास के जितने अनूठे रत्न ब्रज-वसुंधरा में छिपे हैं, उतने भारत में कदाचित कहीं नहीं। पूछो ह्‌वेनसांग से। जानो फाह्यान से। मुगलकाल में बादशाहों द्वारा लिखी या लिखवाई गई तवारीखों से। जानो ग्राउस क्या कहता है। ग्रियर्सन क्या कह गए हैं ? और कुछ नहीं तो प्राचीन ब्रज-वैभव के दर्शन के लिए एक बार मथुरा के पुरातात्विक संग्रहालय में मत्था अवश्य टेक लीजिए। ब्रज की कला और संस्कृति की उपलब्धियों की एक छोटी-सी मनोहर झांकी से ही आपका मन गौरवान्वित और तृप्त हो जाएगा। यह तो प्रथम चरण है, शुभारंभ है। उत्खनन, अन्वेषण और अनुशीलन होता रहे तो ब्रज की सांस्कृतिक धरोहर के ऐसे चार संग्रहालय और स्थापित किए जा सकते हैं,

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